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Sixteenth Loksabha

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

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श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

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माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

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माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,

 

 डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री दद्दन मिश्रा,

 

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक,

 

श्री अभिषेक सिंह,

 

डॉ. बंशीलाल महतो,

 

श्री लखन लाल साहू एवं

 

श्री विक्रम उसेंडी को योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Regarding 5151st  anniversary of Shrimad Bhagwat Gita.

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): माननीय अध्यक्ष महोदया, यह वर्ष श्रीमद् भगवद् गीता के 5151वें जयन्ती का वर्ष है।  ..(व्यवधान) श्रीमद् भगवद् गीता की स्थली कुरूक्षेत्र में ..(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आपके मेम्बर बोल रहे हैं, कृपया आप बैठिए।.

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : आप भी चिल्लाते जाइए, वे भी चिल्लाएंगे, क्या फर्क रहेगा?

…(व्यवधान)

 योगी आदित्यनाथ:  कुरूक्षेत्र में इस जयन्ती को मनाने के लिए हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं। ..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदया,   श्रीमद् भगवद् गीता एक सार्वदेशिक, सार्वकालिक और सावभौमिक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में किसी पन्थ, मत, मजहब अथवा सप्रदाय के प्रति आग्रही बनने का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग, बिना किसी राग-द्वेष के, प्रशस्त करने का संदेश दिया गया है।  परित्राणाय साधूनाम् और विनाशाय च दुष्कृताम् के भाव के साथ श्रीमद् भगवद् गीता ने मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस आयोजन को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वृहद स्तर पर मनाए जाने की आवश्यकता है, वह भी तब, जब पूरी दुनिया में कहीं ज़ेहादी आतंकवाद, कहीं पर अन्य मजहबी जुनूनों के साये में पूरी मानवता कराह रही है। उन स्थितियों में श्रीमद् भगवद् गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि श्रीमद् भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किया जाए और उसे स्कूली शिक्षा में, माध्यमिक और विश्वविद्यालयी शिक्षा में पाठय़क्रम का हिस्सा बनाकर, मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग इस ग्रन्थ के माध्यम से प्रशस्त किया जाए। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :

 

 श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

श्री केशव प्रसाद मौर्य,

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल,

 

श्री मुकेश राजपूत,

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,

 

श्री निशिकान्त दुबे,

 

श्री देवजी एम. पटेल,

 

श्रीमती कृष्णा राज,

 

श्री पी.पी.चौधरी,

 

श्री प्रहलाद सिंह पटेल,

 

श्री विनोद कुमार सोनकर,

 

श्री अजय मिश्रा टेनी,

 

श्री गणेश सिंह,

 

डॉ. हिना विजयकुमार गावीत,

 

 श्री जगदम्बिका पाल,

 

श्री हरिओम सिंह राठौड़,

 

श्री सी.आर.चौधरी, 

 

श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया,

 

श्री श्यामा चरण गुप्त,