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Title: Need to extend benefits of reservation to socially & economically backward, uneducated and genuine people beloning to Scheduled Tribes living in forest areas

श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा (भरूच) :  अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे आदिवासियों से संबंधित बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न पर जीरो ऑवर में बोलने के लिए अनुमति दी, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूँ।

     महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूँ कि देश के कई राज्यों में  गलत तरीके से नॉन‑ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है। उन प्रमाण पत्रों के आधार पर कई नॉन‑ट्राइबल लोगों को एसटी कोटा में मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं उच्चतम अभ्यास क्रमों में एडमिशन मिल जाता है। ऐसे लोगों को सरकारी नौकरी भी सरलता से मिल जाती है। इससे आदिवासियों का अधिकार समाप्त हो रहा है और वे अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। गुजरात के सौराऐट्र में भी रबारी, भरवाड़ एवं सिद्धी मुसलमान को हजारों की संख्या में प्रमाण पत्र मिल रहे हैं और उन प्रमाण पत्रों के आधार पर एसटी कोटा में हजारों लोगों को नौकरी मिल रही है।

     महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूँ कि जिन लोगों को ट्राइबल कोटे में प्रमाण पत्र मिले हैं, उनके आधार पर जिनको नौकरी मिली है, गलत तरीके से बोग़स प्रमाण पत्र मिले हैं, उन्हें रद्द किया जाए और जिनको नौकरी मिली है, उनको ओपन कैटेगरी में लिया जाए। मैं आपके माध्यम से सरकार से इतना ही अनुरोध करना चाहता हूँ। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष :   डॉ. हिना विजयकुमार गावीत, श्रीमती संतोऐा अहलावत, श्रीमती रक्षाताई खाडसे,  श्री रामसिंह राठवा, कुँवर पु­ऐपेद्र सिंह चन्देल, डॉ. मनोज राजोरिया, श्री हरीश मीना, श्री अर्जुन लाल मीणा, श्री रामचरण बोहरा, श्री निशिकान्त दुबे, श्री भैरों प्रसाद मिश्र, श्री नारणभाई काछड़िया, श्री शिवकुमार उदासि तथा डॉ. किरिट पी. सोलंकी को श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा द्वारा उठाए गए वि­ाय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

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