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Title: Need to give the profit to the farmers on the manufacturing of final food products.

श्रीमती रीती पाठक (सीधी) :  माननीय अध्यक्ष जी, आपने मुझे शून्य काल में बोलने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपकी आभारी हूं। हमारा देश कृषि प्रधान देश है। किसान अन्नदाता कहलाता है। हमें यह भी ज्ञात है कि देश में किसानों का वर्तमान और भवि­ष्य प्रकृति के हवाले हैं। हमने देखा है कि सदन में वर्षों से किसानों के हितों की चिंता के लिए और उनकी स्थिति को ठीक करने के लिए लगातार चर्चा होती आई है। मैं आज बहुत गर्व के साथ कहना चाहती हूं कि किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए जितने भी बेहतरीन प्रयास हुए हैं,  माननीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार द्वारा हुए हैं।

          मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान किसानों की ओर आकृष्ट करना चाहती हूं। किसान कच्चे माल का उत्पादक है, वह उत्पादन करता है, बाजार में बिक्री करता है, लेकिन वह कच्चे माल से बनने वाले बाए प्रोडक्ट से होने वाले मुनाफे के लाभांश से वंचित रह जाता है। जैसे 75 ग्राम आलू से बनाया गया चिप्स का पैकेट बाजार में 25 रुपए के मूल्य में बिकता है जबकि किसान को कच्चे माल का मूल्य 50-75 पैसे ही मिलता है।

          मैं सरकार से आग्रह करना चाहती हूं कि इस तरह के बाए प्रोडक्ट से होने वाले मुनाफे का लाभांश किसानों का दिया जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। 

माननीय अध्यक्ष:

 

डॉ. मनोज राजोरिया,

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र,

 

डॉ. किरीट पी. सोलंकी,

 

श्री सी.पी. जोशी और

 

कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल को श्रीमती रीति पाठक द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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